श्रुत्वा हरिस्तमरणार्थिनमप्रमेय-
श्चक्रायुध: पतगराजभुजाधिरूढ: ।
चक्रेण नक्रवदनं विनिपाट्य तस्मा-
द्धस्ते प्रगृह्य भगवान् कृपयोज्जहार ॥ १६ ॥
अनुवाद
हाथी की पुकार सुनकर श्रीभगवान को लगा कि उसे उनकी तुरंत मदद की जरूरत है क्योंकि वो बहुत संकट में था। इसलिए भगवान पक्षिराज गरुड़ के पंखों पर सवार होकर अपने आयुध चक्र से सज्जित होकर वहाँ पहुँचे। उन्होंने अपने चक्र से मगर के मुँह को टुकड़े-टुकड़े कर दिया ताकि हाथी की रक्षा हो सके और फिर उसकी सूँड़ पकड़कर उसे बाहर निकाल लिया।
Hearing the elephant's cry, Shri Bhagwan felt that the elephant needed His immediate help, as it was in great danger. Then, seated on the wings of the bird king Garuda, the Lord immediately appeared there, armed with His weapon Chakra. To protect the elephant, He broke the crocodile's mouth into pieces with His Chakra and pulled it out by holding it with the elephant's trunk.
तात्पर्य
भगवान अपने वैकुंठ ग्रह पर निवास करते हैं। कोई भी यह अनुमान नहीं लगा सकता है कि यह ग्रह कितनी दूर स्थित है। हालाँकि, यह कहा जाता है कि हवाई जहाजों या दिमागी जहाजों से उस ग्रह तक पहुँचने की कोशिश करने वाले, लाखों वर्षों तक यात्रा करने के बाद भी इसे अज्ञात पाएँगे। आधुनिक वैज्ञानिकों ने हवाई जहाजों का आविष्कार किया है जो भौतिक हैं, और योगी मन जहाजों से यात्रा करने के लिए एक और भी महीन भौतिक प्रयास करते हैं। योगी दिमागी जहाजों की मदद से बहुत जल्दी किसी भी दूरस्थ स्थान तक पहुँच सकते हैं। लेकिन न तो हवाई जहाज और न ही दिमागी जहाज का भौतिक आकाश से बहुत दूर स्थित वैकुंठलोक में भगवान के राज्य में प्रवेश है। चूँकि यही स्थिति है, तो हाथी की प्रार्थनाओं को इतनी असीम दूर से कैसे सुना जा सकता था, और भगवान एक ही बार में उस स्थान पर कैसे प्रकट हो सकते थे? इन चीजों की गणना मानवीय कल्पना द्वारा नहीं की जा सकती। यह सब भगवान की असीमित शक्ति द्वारा संभव था, और इसलिए भगवान को यहाँ अप्रमेय रूप से वर्णित किया गया है, क्योंकि सर्वोत्तम मानवीय मस्तिष्क भी उनकी शक्तियों और क्षमताओं का गणितीय गणना द्वारा अनुमान नहीं लगा सकता है। भगवान इतनी दूर से सुन सकते हैं, वह वहाँ से खा सकते हैं, और वह एक क्षण की सूचना पर सभी स्थानों पर एक साथ प्रकट हो सकते हैं। भगवान की सर्वशक्तिमानता ऐसी ही है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥