सत्रे ममास भगवान् हयशीरषाथो
साक्षात् स यज्ञपुरुषस्तपनीयवर्ण: ।
छन्दोमयो मखमयोऽखिलदेवतात्मा
वाचो बभूवुरुशती: श्वसतोऽस्य नस्त: ॥ ११ ॥
अनुवाद
मैं, ब्रह्मा, ने जो यज्ञ किया, उसमें भगवान ने हयग्रीव अवतार के रूप में प्रकट होकर स्वयं को प्रस्तुत किया। वे स्वयं यज्ञ हैं और उनके शरीर का रंग सोने जैसा है। वे स्वयं वेद हैं और सभी देवताओं की परम आत्मा हैं। जब उन्होंने साँस ली, तो उनके नथुनों से सभी मधुर वैदिक भजनों की ध्वनियाँ निकलीं।
In the yajna performed by me (Brahma), the Lord appeared in the form of Hayagriva. He is the yajna personified and his body is golden in colour. He is also the Vedas personified and the Supreme Being of all the gods. When he breathed, the sounds of all the sweet Vedic hymns emerged from his nostrils.
तात्पर्य
वैदिक सूक्त आमतौर पर कामना करने वाले लोगों द्वारा किए जाने वाले यज्ञों के लिए निर्दिष्ट होते हैं जो अपने कामनाओं के फल को प्राप्त करने के लिए देवताओं को प्रसन्न करना चाहते हैं। लेकिन प्रभु स्वयं यज्ञों और वैदिक सूक्तों के रूप में अवतरित हैं। इसलिए जो व्यक्ति सीधे प्रभु के भक्त हैं, उन्होंने यज्ञ के दोनों उद्देश्यों की पूर्ति की है और देवताओं को प्रसन्न भी किया है। प्रभु के भक्त वैदिक विधियों के अनुसार यज्ञ नहीं करते या देवताओं को प्रसन्न नहीं करते, फिर भी भक्त कामना करने वाले कर्मियों या विभिन्न देवताओं के उपासकों से श्रेष्ठ हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥