वसति दशन-शिखरे धरणी तव लग्ना
शशिनि कलंक-कलेव निमग्ना
केशव धृत-शूकर-रूप
जय जगदीश हरि
"हे केशव! हे परमेश्वर जिसने शूकर का रूप धारण किया है! हे प्रभु! ग्रह पृथ्वी तुम्हारे दांतों पर टिकी हुई थी और वह चंद्रमा की तरह दिखाई पड़ती थी जिस पर दाग हो।"
प्रभु के अवतार के लक्षण ऐसे होते हैं। प्रभु का अवतार काल्पनिक लोगों की मनगढ़ंत कल्पना नहीं होता है जो अपनी कल्पना से अवतार को रूप देते हैं। प्रभु का अवतार जैसा कि ऊपर उल्लेखित अवसर था, विशेष परिस्थितियों में होता है और अवतार ऐसा कार्य करता है जिसकी मनुष्य के छोटे से दिमाग में कल्पना भी नहीं की जा सकती। भगवान के सस्ते और ढेरों अवतार रचने वाले आधुनिक रचयिता ग्रह पृथ्वी को ले जाने के लिए विशालकाय मुंह वाली ईश्वर के विशालकाय शूकर अवतार को तथ्य के तौर पर देख सकते हैं।
जब प्रभु पृथ्वी को उठाने के लिए प्रकट हुए, हिरण्याक्ष नामक दानव ने प्रभु के क्रमबद्ध कार्यों में बाधा पैदा करने की कोशिश की इसलिए उसे प्रभु के दांत से भेदकर मार दिया गया। श्रील जीवा गोस्वामी के अनुसार दानव हिरण्याक्ष को प्रभु के हाथों से मारा गया था। इसलिए उनके अनुसार प्रभु के हाथों से मारे जाने के बाद दानव को दांत से भेद दिया गया था। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर इस वर्णन की पुष्टि करते हैं।
