भगवान् के जननांगों से जल, वीर्य, उत्पत्ति, वर्षा और प्रजा उत्पन्न होती है। उनके जननांग उस आनंद के कारण होते हैं जो जन्म के कष्टों के प्रतिकार के लिए है।
Water, semen, creation, rain and Prajapatis are born from the genitals of God. His genitals are the cause of that bliss which can counteract the pain of birth.
तात्पर्य
जननांगों और संतानोत्पादन के सुख पारिवारिक बोझ के कष्टों को कम करते हैं। अगर भगवान की कृपा से जननांगों की सतह पर लेपन, एक सुखदायक पदार्थ न होता तो लोग पूर्ण रूप से संतान उत्पन्न करना बंद कर देते। यह पदार्थ इतना तीव्र सुख देता है कि यह पारिवारिक बोझ का कष्ट पूरी तरह से कम कर देता है। एक व्यक्ति इस सुखदायक पदार्थ से इतना मोहित होता है कि उसे एक बच्चा होने से संतुष्टि नहीं मिलती, बल्कि वह महज इस सुखदायक पदार्थ के लिए, भरण-पोषण के संबंध में बड़े जोखिम के साथ, बच्चों की संख्या बढ़ाता रहता है। हालाँकि यह सुखदायक पदार्थ झूठा नहीं है, क्योंकि यह भगवान के दिव्य शरीर से उत्पन्न होता है। दूसरे शब्दों में, सुखदायक पदार्थ एक वास्तविकता है, लेकिन भौतिक दूषण के कारण इसने विकृतता का रूप ले लिया है। भौतिक दुनिया में, भौतिक संपर्क के कारण यौन जीवन कई कष्टों का कारण बनता है। इसलिए, भौतिक दुनिया में यौन जीवन को आवश्यकता से अधिक प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। भौतिक दुनिया में भी संतान उत्पन्न करने की आवश्यकता होती है, लेकिन बच्चों का ऐसा उत्पन्न होना आध्यात्मिक मूल्यों के लिए पूर्ण जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। मानवीय अस्तित्व के भौतिक स्वरूप में जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों को प्राप्त किया जा सकता है, और मनुष्य को आध्यात्मिक मूल्यों के संदर्भ में परिवार नियोजन को अपनाना चाहिए, अन्यथा नहीं। गर्भ निरोधकों आदि के उपयोग से पारिवारिक प्रतिबंध का निम्नतर रूप भौतिक दूषण का घोरतम प्रकार है। इन उपकरणों का उपयोग करने वाले भौतिकवादी आध्यात्मिक महत्व को जाने बिना, कृत्रिम तरीकों से जननांगों पर लेपन की आनंद क्षमता का पूरी तरह से उपयोग करना चाहते हैं। और आध्यात्मिक मूल्यों के ज्ञान के बिना, कम बुद्धिमान व्यक्ति केवल जननांगों के भौतिक संवेदी सुख का उपयोग करने का प्रयास करता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥