यस्यिका-निश्वसिता-कालमथवलम्ब्य
जीवन्ति लोम-विलाजा जगद-अंडा-नाथाः
विष्णुर महान स इहा यस्य कला-विशेषो
गोविन्दम आदि-पुरुषं तम अहम भजामी
सभी असंख्य ब्रह्मांड केवल महा-विष्णु, या कारणार्णवशायी विष्णु की श्वास लेने की अवधि के दौरान ही बने रहते हैं, जो कि केवल गोविंद का एक पूर्ण भाग है, ईश्वर का मूल व्यक्तित्व प्रभु कृष्ण।
