हे मेरे प्रिय पुत्र, उसके बाद तुम्हारे नौ भाईयों, जो प्रजाओं के स्वामी हैं, ने व्यक्त और अव्यक्त दोनों प्रकार के पुरुषों को प्रसन्न करने के लिए उचित विधियों सहित यज्ञ संपन्न किया।
O son, thereafter your nine brothers, who are the Prajapatis, performed a sacrifice with appropriate rites to please both the manifest and unmanifest persons.
तात्पर्य
अभिव्यक्त व्यक्तित्व स्वर्गीय राज्य के शासक इंद्र और उनके सहयोगियों जैसे देवता हैं; और अभिव्यक्त व्यक्तित्व स्वयं प्रभु हैं। अभिव्यक्त व्यक्तित्व भौतिक मामलों के सांसारिक नियंत्रक हैं, जबकि ईश्वर का अभिव्यक्त व्यक्तित्व पारलौकिक है, भौतिक वातावरण की सीमा से परे है। कलियुग में प्रकट देवताओं को भी नहीं देखा जा सकता है, क्योंकि अंतरिक्ष यात्रा पूरी तरह से बंद हो गई है। इसलिए शक्तिशाली देवता और भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व दोनों आधुनिक मनुष्य की आंखों से छिपे हुए हैं। आधुनिक मनुष्य अपनी आँखों से सब कुछ देखना चाहते हैं, हालाँकि वे पर्याप्त रूप से योग्य नहीं हैं। नतीजतन, वे देवताओं या सर्वोच्च ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं करते हैं। उन्हें प्रामाणिक धर्मग्रंथों के पन्नों के माध्यम से देखना चाहिए और केवल अपनी अयोग्य आँखों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। इन दिनों में भी, ईश्वर को योग्य आँखों से भी देखा जा सकता है जो ईश्वर के प्रेम के मरहम से सजी हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥