श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 6: पुरुष सूक्त की पुष्टि  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.6.17 
स्वधिष्ण्यं प्रतपन् प्राणो बहिश्च प्रतपत्यसौ ।
एवं विराजं प्रतपंस्तपत्यन्तर्बहि: पुमान् ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
सूर्य अपने विकिरणों के विस्तार से भीतर और बाहर प्रकाशमान करता है; इसी प्रकार, परमेश्वर अपना विराट रूप फैलाकर सभी पक्षों से दुनिया में सभी वस्तुओं को संभालते हैं।
 
The sun expands its radiations and distributes light inside and outside. Similarly, the Lord expands His cosmic form and maintains each and every object in this universe from inside and outside.
तात्पर्य
भगवान का सार्वभौमिक रूप, या भगवान की अवैयक्तिक विशेषता जिसे ब्रह्मज्योति के रूप में जाना जाता है, यहाँ स्पष्ट रूप से समझाया गया है और सूर्य के विकिरण से इसकी तुलना की गई है। धूप पूरे ब्रह्मांड में फैल सकती है, लेकिन धूप का स्रोत, अर्थात् सूर्य ग्रह या सूर्य-नारायण के रूप में जाना जाने वाला देवता, ऐसे विकिरण का आधार है। इसी तरह, भगवान कृष्ण भगवान सर्वोच्च व्यक्तित्व वाले ईश्वर अवैयक्तिक ब्रह्मज्योति विकिरण या भगवान की अवैयक्तिक विशेषता का आधार हैं। इसकी पुष्टि भगवद-गीता (14.27) में की गई है। इसलिए भगवान का सार्वभौमिक रूप भगवान के अवैयक्तिक रूप की द्वितीयक कल्पना है, लेकिन भगवान का प्राथमिक रूप श्यामसुंदर है, दो हाथों वाला, जिस पर उनकी शाश्वत बांसुरी बजती है। भगवान के विस्तृत विकिरण का पचहत्तर प्रतिशत आध्यात्मिक आकाश (त्रिपाद-विभूति) में प्रकट होता है, और उनके व्यक्तिगत विकिरण का पच्चीस प्रतिशत भौतिक ब्रह्मांडों के पूरे विस्तार को समाहित करता है। इसकी व्याख्या और विवरण भगवद गीता (10.42) में भी किया गया है। इस प्रकार उनके विकिरण के पचहत्तर प्रतिशत विस्तार को उनकी आंतरिक ऊर्जा कहा जाता है, जबकि पच्चीस प्रतिशत विस्तार को भगवान की बाहरी ऊर्जा कहा जाता है। जीवित संस्थाएं, जो आध्यात्मिक और भौतिक विस्तार दोनों के निवासी हैं, उनकी सीमांत ऊर्जा (तटस्थ-शक्ति) हैं, और वे बाहरी या आंतरिक ऊर्जा में से किसी में भी रहने के लिए स्वतंत्र हैं। जो लोग भगवान के आध्यात्मिक विस्तार के भीतर रहते हैं उन्हें मुक्त आत्मा कहा जाता है, जबकि बाहरी विस्तार के निवासियों को बाध्य आत्मा कहा जाता है। हम केवल आंतरिक विस्तार के निवासियों की संख्या का बाहरी ऊर्जा में निवासियों की संख्या से तुलना करके एक अनुमान लगा सकते हैं और आसानी से यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि मुक्त आत्माएँ बाध्य आत्माओं की तुलना में कहीं अधिक हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)