अव्यक्तरससिन्धूनां भूतानां निधनस्य च ।
उदरं विदितं पुंसो हृदयं मनस: पदम् ॥ ११ ॥
अनुवाद
प्रभु का अव्यक्त स्वरूप महान महासागरों का वास है और उनका उदर भौतिक रूप से नष्ट हुई जीवों की शरणस्थली है। उनका हृदय जीवों के सूक्ष्म भौतिक शरीरों का निवास है। बुद्धिमान व्यक्ति इसे इस प्रकार जानते हैं।
The formless form of the Lord is the abode of the oceans and His belly is the abode of materially perished beings. His heart is the abode of the subtle physical bodies of living beings. Wise people know it this way.
तात्पर्य
भगवद् गीता (8.17-18) में कहा गया है कि मानवीय गणनाओं के अनुसार ब्रह्मा का एक दिन चार सहस्राब्दियों (4,300,000 वर्ष) के एक हजार युगों के बराबर है, और उतनी ही अवधि को उसकी रात्रि भी माना जाता है। एक ब्रह्मा सौ ऐसे वर्षों तक जीवित रहता है और फिर मर जाता है। एक ब्रह्मा, जो आम तौर पर भगवान का एक महान भक्त होता है, ऐसे पतन के बाद मुक्ति प्राप्त करता है। ब्रह्मांड (ब्रह्मांड कहलाता है, या एक ब्रह्मा द्वारा नियंत्रित गोल फुटबॉल के आकार का क्षेत्र) इस प्रकार नष्ट हो जाता है, और इस प्रकार एक विशेष ग्रह के निवासी, या पूरे ब्रह्मांड के निवासी भी नष्ट हो जाते हैं। इस श्लोक में वर्णित अव्यक्त का अर्थ ब्रह्मा की रात्रि है, जब आंशिक विनाश होता है और उस विशेष ब्रह्मांड के जीवित प्राणी, ब्रह्मलोक के ग्रहों तक, बड़े महासागरों आदि के साथ, सभी विराट पुरुष के पेट में निवास करते हैं। ब्रह्मा की रात के अंत में, सृष्टि फिर से होती है, और भगवान के पेट में सुरक्षित जीवित प्राणियों को अपनी-अपनी भूमिकाएँ निभाने के लिए छोड़ दिया जाता है जैसे कि एक गहरी नींद से जागृत किया जा रहा हो। चूँकि जीवित प्राणियों को कभी नष्ट नहीं किया जाता है, इसलिए भौतिक जगत का विनाश जीवित प्राणियों के अस्तित्व को नष्ट नहीं करता है, लेकिन जब तक मुक्ति प्राप्त नहीं हो जाती तब तक व्यक्ति को बार बार एक के बाद एक भौतिक शरीर स्वीकार करना पड़ता है। मानव जीवन इस दोहराए जाने वाले शारीरिक परिवर्तन का समाधान करने और इस तरह आध्यात्मिक आकाश में एक स्थान प्राप्त करने के लिए है, जहाँ सब कुछ शाश्वत, आनंदमय और ज्ञान से भरा हुआ है। दूसरे शब्दों में, जीवित प्राणियों के सूक्ष्म रूप परम सत्ता के हृदय में निवास करते हैं, और ऐसे रूप सृष्टि के समय मूर्त आकार लेते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥