आत्मन् भावयसे तानी न पराभावयन् स्वयम् ।
आत्मशक्तिमवष्टभ्य ऊर्णनाभिरिवाक्लम: ॥ ५ ॥
अनुवाद
जिस प्रकार मकड़ी अपने जाले को आसानी से बना लेती है और अपनी सृजन शक्ति को बिना किसी से हारे हुए दिखाती है, उसी तरह आप भी अपनी आत्मनिर्भर शक्ति के इस्तेमाल से बिना किसी और की मदद के सृजन करें।
Just as a spider spins its web with ease and shows its creative power without being overcome by others, you use your self-reliant power to create without seeking help from others.
तात्पर्य
स्वावलंबन का सबसे बढ़िया उदाहरण है सूर्य। अन्य किसी भी पिंड से प्रकाशित होने की जरूरत सूर्य को नहीं होती है। बल्कि, अन्य सभी प्रकाशित करने वाले कारकों की सहायता सूर्य करता है, क्योंकि सूर्य की उपस्थिति में अन्य कोई भी प्रकाशित करने वाले कारक प्रधान नहीं होते हैं। नारद ने ब्रह्मा की स्थिति की तुलना मकड़ी के स्वावलंबन से की है, जो अपनी लार की उर्जा से ही सृजन कर अपने क्रियाकलाप का क्षेत्र स्वयं बनाता है, और दूसरो की किसी भी सहायता का उसे सहारा नहीं लेना पड़ता।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥