श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 5: समस्त कारणों के कारण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.5.3 
सर्वं ह्येतद् भवान् वेद भूतभव्यभवत्प्रभु: ।
करामलकवद् विश्वं विज्ञानावसितं तव ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
हे मेरे पिता, आप इस सबको वैज्ञानिक रूप से जानते हैं, क्योंकि जो भी पहले बना था, जो भी भविष्य में बनेगा और जो आज बन रहा है और जो भी ब्रह्मांड की सीमा में है, वे सब जैसे आंवला आपकी मुट्ठी में है।
 
O Father, You know all this scientifically because whatever was created in the past, whatever will be created in the future or whatever is being created in the present and all the things that are there within this universe, they are all like Amla in Your palm.
तात्पर्य
ब्रह्मा प्रकट ब्रह्मांड एवं ब्रह्मांड में उपस्थित सभी वस्तुओं को बनाने वाले हैं। इसलिए उन्हें भूत, भविष्य और वर्तमान सबकी जानकारी होती है। प्रमुख तीन वस्तुएँ जीव, घटनात्मक दुनिया और नियंत्रक सभी लगातार क्रियाशील रहते हैं - भूत, भविष्य और वर्तमान - और प्रत्यक्ष रूप से प्रबंध करने वाले को ऐसी हर क्रिया और प्रतिक्रिया के बारे में सब पता होता है, जैसे किसी को अपनी मुट्ठी में बंद एक अखरोट के बारे में पता होता है। किसी भी विशिष्ट चीज के प्रत्यक्ष निर्माता के बारे में माना जाता है कि उसे कला के तरीके के बारे में पता होगा, उसे सामग्री कहाँ मिलेगी, वह इसे कैसे स्थापित करेगा और निर्माण प्रक्रिया में तैयार होने वाले उत्पाद कैसा होगा। क्योंकि ब्रह्मा सर्वप्रथम जन्मे जीव हैं, स्वाभाविक रूप से यह माना जाता है कि सृजन कार्यों के बारे में उन्हें सब पता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)