श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 5: समस्त कारणों के कारण  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.5.25 
तामसादपि भूतादेर्विकुर्वाणादभून्नभ: ।
तस्य मात्रा गुण: शब्दो लिङ्गं यद् द्रष्टृद‍ृश्ययो: ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
मिथ्या अहंकार के अंधेरे से, पाँच तत्वों में से पहला तत्व आकाश उत्पन्न होता है। इसका सूक्ष्म रूप शब्द गुण है, जिस प्रकार एक द्रष्टा का दृश्यमान के साथ संबंध होता है।
 
मिथ्या अहंकार के अंधेरे से, पाँच तत्वों में से पहला तत्व आकाश उत्पन्न होता है। इसका सूक्ष्म रूप शब्द गुण है, जिस प्रकार एक द्रष्टा का दृश्यमान के साथ संबंध होता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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