श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 5: समस्त कारणों के कारण  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.5.20 
स एष भगवाल्लिंङ्गैस्त्रिभिरेतैरधोक्षज: ।
स्वलक्षितगतिर्ब्रह्मन् सर्वेषां मम चेश्वर: ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण नारद, परम द्रष्टा परमेश्वर प्रकृति के ऊपर बताए गए तीनों गुणों के कारण जीवों की इंद्रियों की अनुभूति से परे हैं। पर वे मुझ समेत सबके नियंत्रक हैं।
 
हे ब्राह्मण नारद, परम द्रष्टा परमेश्वर प्रकृति के ऊपर बताए गए तीनों गुणों के कारण जीवों की इंद्रियों की अनुभूति से परे हैं। पर वे मुझ समेत सबके नियंत्रक हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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