आत्मा और परमात्मा के संबंध में पारलौकिक ज्ञान में अभूतपूर्व दुनिया का ज्ञान और इसके निर्माण का आधार शामिल है। अभूतपूर्व दुनिया में किसी भी बुद्धिमान व्यक्ति द्वारा तीन चीजों को तथ्यात्मक रूप से देखा जाता है: जीवित प्राणी, प्रकट दुनिया और उन पर अंतिम नियंत्रण। बुद्धिमान व्यक्ति देख सकता है कि न तो जीवित इकाई और न ही अभूतपूर्व दुनिया संयोग की रचनाएं हैं। सृजन की समरूपता और इसकी नियामक क्रियाएँ और प्रतिक्रियाएँ उनके पीछे एक बुद्धिमान मस्तिष्क की योजना का सुझाव देती हैं, और वास्तविक जांच द्वारा कोई भी उस अंतिम कारण का पता लगा सकता है जो उन्हें तथ्यात्मक रूप से जानता है।
