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श्लोक 2.5.15  |
नारायणपरा वेदा देवा नारायणाङ्गजा: ।
नारायणपरा लोका नारायणपरा मखा: ॥ १५ ॥ |
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| अनुवाद |
| सारे वैदिक ग्रंथ परमेश्वर से ही बने हैं और उन्हीं के लिए बने हैं। देवता भी भगवान् के शरीर के अंगों की तरह उन्हीं की सेवा के लिए बने हैं। विभिन्न लोक भी भगवान् के लिए हैं और विभिन्न यज्ञ उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए किये जाते हैं। |
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| सारे वैदिक ग्रंथ परमेश्वर से ही बने हैं और उन्हीं के लिए बने हैं। देवता भी भगवान् के शरीर के अंगों की तरह उन्हीं की सेवा के लिए बने हैं। विभिन्न लोक भी भगवान् के लिए हैं और विभिन्न यज्ञ उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए किये जाते हैं। |
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