कृपया बताएं कि सर्व-शक्तिमान परमेश्वर अपनी विभिन्न शक्तियों और विभिन्न अंशों को इस दृश्य जगत को बनाए रखने और फिर इसे एक खिलाड़ी के खेल की तरह समेट लेने के लिए किस प्रकार नियोजित करते हैं?
Please explain how Almighty God applies His various powers and various parts to shepherd this world of practice and then brings it together again like a player's game?
तात्पर्य
कठोपनिषद (2.2.13) ने परमेश्वर को अन्य सभी अनंत व्यक्तिगत प्राणियों के बीच अनंत पुरुष और मुख्य अनंत पुरुष (नित्यो नित्यानाम चेतनश्चेतनानाम) और एक परमेश्वर के रूप में वर्णित किया है जो असंख्य अन्य व्यक्तिगत जीवों (एको बहूनाम यो विदधाति कामन) को अपना रखता है। तो सभी जीवित प्राणी, शर्त वाले राज्य और मुक्त राज्य दोनों में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा बनाए रखे जाते हैं। ऐसे रख-रखाव को प्रभु द्वारा अपने स्वरूप के विभिन्न विस्तारों और तीन प्रधान उर्जाओ, जैसे की आंतरिक, बाहरी और मझली उर्जाओं द्वारा प्रभावित किया जाता है। जीवित प्राणी उनकी मझली उर्जा है, और उनमें से कुछ, प्रभु के विश्वास पर उनको सृजन के कार्य सौंपे जाते हैं, जैसे ब्रह्मा, मरिची इत्यादि, और सृजन के कार्य प्रभु द्वारा उन तक प्रेरित किए जाते हैं (तेने ब्रह्म हृदा)। बाहरी उर्जा (माया) भी जीव, या फिर शर्त वाली आत्माओं से गर्भित है। मध्यम अनियंत्रित क्षमता आध्यात्मिक जगत में कार्य करती है, और प्रभु, अपने विभिन्न पूर्ण विस्तारों के द्वारा, उन्हें आध्यात्मिक आकाश में प्रदर्शित किये गए विभिन्न आध्यात्मिक सम्बन्धों में रखता है। एक परमेश्वर का व्यक्तित्व अनेक रूपों में स्वयं को प्रकट करता है, और इस प्रकार सभी विविधता उसमें है। और वह सभी विविधताओं में है, हालाँकि वे उन सभी से अलग है। यही है प्रभु की अविश्वसनीय रहस्यवादी शक्ति, और इस प्रकार सभी कुछ उसी के साथ है और उससे अलग है उसकी अविश्वसनीय क्षमताओं (अचिन्त्य-भेदा-भेदा-तत्त्व) के द्वारा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥