यस्य देवे परा भक्ति
यथा देवे तथा गुरु
तस्यैते कथिता ह्यर्था
प्रकाशंते महात्मनः
(श्वेताश्वतर उपनिषद 6.23)
जब एक भूखे व्यक्ति को खाने के लिए भोजन दिया जाता है, तो वह एक साथ भूख की तृप्ति और भोजन का आनंद महसूस करता है। इस प्रकार उसे यह पूछने की ज़रूरत नहीं है कि वास्तव में उसे भोजन दिया गया है या नहीं। श्रीमद-भागवतम को सुनने की महत्वपूर्ण परीक्षा यह है कि इस तरह के कृत्य से व्यक्ति को सकारात्मक ज्ञान प्राप्त करना चाहिए।
