सिद्धांतों में कोई उपयोगिता नहीं है। ज्ञान तथ्यात्मक होना चाहिए। कई चीजें ऐसी होती हैं जो जटिल होती हैं, और जब तक उन्हें कोई जानकार व्यक्ति समझाए नहीं तब तक कोई उन्हें समझ नहीं सकता है। वैदिक ज्ञान को जानना भी बहुत कठिन है और इसे उपर्युक्त प्रणाली द्वारा ही सीखा जाना चाहिए; अन्यथा यह बिल्कुल भी समझ में नहीं आता है।
इसलिए, शुकदेव गोस्वामी ने प्रभु की दया के लिए प्रार्थना की ताकि वह वही संदेश दोहरा सकें जो सीधे प्रभु ने ब्रह्मा से कहा था, या जो सीधे ब्रह्मा ने नारद से कहा था। इसलिए, शुकदेव गोस्वामी द्वारा बताए गए सृजन के कथन बिल्कुल भी सैद्धांतिक नहीं हैं, जैसा कि सांसारिक लोग कहते हैं, बल्कि पूरी तरह से सही हैं। जो व्यक्ति इन संदेशों को सुनता है और उन्हें आत्मसात करने का प्रयास करता है, उसे भौतिक सृष्टि की उत्तम जानकारी मिलती है।
