श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 4: सृष्टि का प्रक्रम  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.4.24 
नमस्तस्मै भगवते वासुदेवाय वेधसे ।
पपुर्ज्ञानमयं सौम्या यन्मुखाम्बुरुहासवम् ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
मैं पूरे हृदय से साक्षात् वासुदेव के अवतार, श्रील व्यासदेव को नमन करता हूं, जिन्होंने वैदिक शास्त्रों का संकलन किया। प्रभु की कमल सी मुख से टपकते अमृतोपम दिव्य ज्ञान को शुद्ध भक्त पान करते हैं।
 
I pay my respectful obeisances to Srila Vyasdev, the incarnation of Vasudeva, who compiled the Vedic scriptures. Pure devotees drink the nectar of divine knowledge dripping from the lotus-like mouth of the Lord.
तात्पर्य
वेदहस या "अलौकिक ज्ञान पद्धति के संकलनकर्ता" नामक विशिष्ट वचन के अनुपालन में, श्रील श्रीधरा स्वामी ने टिप्पणी की है कि श्रध्दांजलि श्रील व्यासदेव को अर्पित की जाती है, जो वासुदेव के अवतार हैं। श्रील जीव गोस्वामी इस बात से सहमत हैं, लेकिन श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने बताया है कि भगवान कृष्ण के मुंह से निकलने वाले अमृत को उनकी विभिन्न पत्नियों तक पहुंचाया जाता है और इस तरह वे संगीत, नृत्य, वस्त्र, आभूषण और ऐसी सभी चीजों की सूक्ष्म कला सीखती हैं जो भगवान को पसंद है। भगवान द्वारा आनंद लिए जाने वाला संगीत, नृत्य और आभूषण निश्चित रूप से सांसारिक नहीं है क्योंकि भगवान को शुरू में ही पर या पारलौकिक कहा गया है। यह आध्यात्मिक ज्ञान भूली हुई शर्त युक्त आत्माओं के लिए अज्ञात है। श्रील व्यासदेव, जो भगवान के अवतार हैं, ने इस प्रकार वैदिक साहित्य का संकलन किया ताकि भगवान के साथ अपने अनन्त संबंध के बारे में भूले-बिसरे शर्त युक्त आत्माओं की खोई हुई स्मृति को पुनर्जीवित किया जा सके। इसलिए, वैदिक शास्त्रों या व्यासदेव या शुकदेव के कमल के मुख से युग्मित स्वभाव में अपने पति द्वारा अपनी पत्नियों को हस्तांतरित अमृत को समझने की कोशिश करनी चाहिए। पारलौकिक ज्ञान के क्रमिक विकास से, कोई संगीत और नृत्य की पारलौकिक कलाओं के स्तर तक पहुंच सकता है जो भगवान ने अपने रास-लीला में प्रदर्शित किया है। लेकिन वैदिक ज्ञान के बिना कोई शायद ही भगवान के रास नृत्य और संगीत की पारलौकिक प्रकृति को समझ सकता है। हालाँकि, भगवान के शुद्ध भक्त अमृत को गहन दार्शनिक प्रवचनों के रूप में और रास नृत्य में भगवान द्वारा चुंबन के रूप में समान रूप से पसंद कर सकते हैं, क्योंकि दोनों के बीच कोई सांसारिक अंतर नहीं है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)