शुकदेव गोस्वामी भगवान से यह प्रार्थना कर रहे हैं कि भगवान के द्वारा भीतर से प्रेरणा मिलने के कारण वह महाराजा परीक्षित द्वारा पूछे गए सृष्टि के तथ्यों और आंकड़ों को यथावत समझा सकेंगे। एक आध्यात्मिक गुरु कोई सैद्धांतिक सट्टेबाज नहीं होता, जैसे कि सांसारिक विद्वान होते हैं, बल्कि वह श्रौत्रियं ब्रह्म-निष्ठ होता है।
