वे जो अपनी पवित्र गतिविधियों से फल प्राप्त करना चाहते हैं, जो मोक्ष और परम के साथ एकता की इच्छा रखते हैं, और जो रहस्यवादी शक्ति की भौतिक पूर्णता की इच्छा रखते हैं, सभी बेचैन हैं क्योंकि वे अपने लिए कुछ चाहते हैं, लेकिन भक्त पूरी तरह से शांत है क्योंकि उसे खुद के लिए कोई मांग नहीं है और वह हमेशा प्रभु की इच्छा की सेवा के लिए तैयार रहता है। निष्कर्ष इसलिए है, कि प्रभु सभी के लिए है क्योंकि कोई भी अपनी इच्छाओं के परिणाम को उनकी स्वीकृति के बिना प्राप्त नहीं कर सकता है, लेकिन जैसा कि भगवद-गीता (8.9) में भगवान द्वारा बताया गया है, ऐसे सभी परिणाम केवल उन्हीं द्वारा दिए जाते हैं, क्योंकि प्रभु सभी का (मूल नियंत्रक) हैं, अर्थात् वेदांती, महान कर्म-कांडी, महान धार्मिक नेता, तपस्या करने वाले और वे सभी जो आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रयास कर रहे हैं। लेकिन अंततः उनका साक्षात्कार केवल निरर्थक भक्तों द्वारा ही किया जाता है। इसलिए भगवान की भक्ति सेवा पर श्रील शुकदेव गोस्वामी द्वारा विशेष बल दिया गया है।
