मैं उन सर्वमंगलमय भगवान् श्रीकृष्ण को सादर प्रणाम करता हूँ जिनकी स्तुति, भजन, दर्शन, भक्ति, श्रवण और पूजन से साधक के समस्त पाप तुरंत धुल जाते हैं।
I offer my respectful obeisances unto the all-auspicious Lord, Sri Krishna, whose praises, remembrance, sight, worship, hearing and adoration wash away all the sins of a sinner instantly.
तात्पर्य
पापों के सभी परिणामों से मुक्त होने के लिए धार्मिक प्रक्रियाओं के महान रूप का सुझाव यहाँ महानतम प्राधिकारी श्री शुकदेव गोस्वामी ने दिया है। कीर्तन या भगवान का गुणगान बहुत से तरीकों से किया जा सकता है, जैसे स्मरण करना, देवता के दर्शन के लिए मंदिर जाना, भगवान के सामने प्रार्थना करना और श्रीमद-भागवत या भगवद-गीता में वर्णित प्रभु के महिमामंडन का पाठ सुनना। कीर्तन, भगवान की महिमा के साथ मधुर संगीत के साथ गायन द्वारा और श्रीमद भागवत या भगवद गीता जैसे शास्त्रों का पाठ करके किया जा सकता है। भक्तों को प्रभु की शारीरिक अनुपस्थिति में निराश होने की आवश्यकता नहीं है, यद्यपि वे सोच सकते हैं कि उनके साथ जुड़े नहीं हैं। मंत्रोच्चार, श्रवण, स्मरण आदि की भक्ति प्रक्रिया (या तो सभी या कुछ, या उनमें से एक भी), हमें प्रभु के साथ जुड़ने का वांछित परिणाम उपरोक्त तरीके से प्रभु की पारलौकिक प्रेममयी सेवा का निर्वहन करके दे सकता है। यहाँ तक कि भगवान कृष्ण या राम के पवित्र नाम की ध्वनि भी आध्यात्मिक रूप से वातावरण को तुरंत बढ़ा सकती है। हमें निश्चित रूप से पता होना चाहिए कि भगवान वहीं मौजूद हैं जहां इस तरह की शुद्ध पारलौकिक सेवा की जाती है, और इस तरह निरापराध कीर्तन करने वाले का भगवान के साथ सकारात्मक संबंध होता है। इसी तरह, स्मरण और प्रार्थनाएँ भी हमें वांछित परिणाम दे सकती हैं यदि उन्हें विशेषज्ञ मार्गदर्शन में ठीक से किया जाए। व्यक्ति को भक्ति सेवा के रूपों का आविष्कार नहीं करना चाहिए। मंदिर में प्रभु के रूप की पूजा कर सकते हैं, या कोई भी मस्जिद या चर्च में प्रभु को भक्तिमय प्रार्थनाएँ अर्पित कर सकता है। मंदिर में पूजा करके या चर्च में प्रार्थना करके प्रतिक्रियाओं से मुक्त होना निश्चित है बशर्ते कि कोई भी पापों से स्वेच्छा से मुक्त होने की अपेक्षा में पाप करने के बारे में बहुत सावधान रहे। भक्ति सेवा के आधार पर जानबूझकर पाप करने की यह मानसिकता नमो बलद यस्या हि पाप-बुद्धिह कहलाती है, और यह भक्ति सेवा के निर्वहन में सबसे बड़ा अपराध है। श्रवण, इसलिए, पापों के ऐसे नुकसानों से खुद को सख्ती से सावधान रखने के लिए आवश्यक है। और श्रवण प्रक्रिया पर विशेष जोर देने के लिए, गोस्वामी इस मामले में सभी शुभ भाग्य का आह्वान करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥