हिराणमयेन पात्रेण
सत्यस्यापिहितं मुखम
तत्त्वं पूषन् अपावृणु
सत्यधर्माय दृष्टये।
"हे प्रभु, आप ही सबके पालनहार हैं, आध्यात्मिक और भौतिक दोनों और आपकी दया से सब कुछ संपन्न होता है। आपके लिए भक्ति-योग ही सच्चे धर्म की नींव है और मैं ही इस सेवा में संलग्न हूँ। इसलिए कृपया अपने असली चेहरे को दिखाकर मेरी रक्षा करें। कृपया अपने ब्राह्मज्योति से परदा हटा दें ताकि मैं आपको उस रूप में देख सकूँ, जिसमें आप सनातन सुख और ज्ञान हैं।"
