इसलिए निष्कर्ष यह है कि एक गंभीर भक्त को पहले एक आध्यात्मिक गुरु के पास जाना चाहिए जो न केवल वैदिक साहित्य में निपुण है बल्कि तथ्यात्मक रूप से भगवान और उनकी विभिन्न ऊर्जाओं का साक्षात्कार करने वाले एक महान भक्त भी हैं। ऐसे भक्त आध्यात्मिक गुरु की सहायता के बिना, कोई भी भगवान के पारलौकिक विज्ञान में प्रगति नहीं कर सकता। और एक वास्तविक आध्यात्मिक गुरु, जैसे कि शुकदेव गोस्वामी, भगवान के बारे में केवल उनकी आंतरिक शक्तियों के बारे में ही नहीं बोलते, बल्कि यह भी बताते हैं कि वह अपनी बाहरी शक्तियों के साथ कैसे जुड़ते हैं। आंतरिक शक्ति में भगवान के मनोरंजन को वृंदावन में उनकी गतिविधियों में प्रदर्शित किया जाता है, लेकिन उनकी बाहरी शक्ति की कार्यप्रणाली कर्णार्णवशायी विष्णु, गर्भोदकशायी विष्णु और क्षीरोदकशायी विष्णु के उनके रूपों में निर्देशित होती है। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती साहित्य इच्छुक वैष्णवों को अपनी अच्छी सलाह देते हैं जब वे कहते हैं कि उन्हें केवल भगवान की गतिविधियों (जैसे रास-लीला) के बारे में सुनने में रुचि नहीं होनी चाहिए, बल्कि सृष्टि-तत्व, सृजनात्मक कार्यों के संबंध में पुरुषावतारों के उनके मनोरंजनों में गहरी रुचि लेनी चाहिए, महाराज परीक्षित के उदाहरणों का अनुसरण करते हुए, आदर्श शिष्य और शुकदेव गोस्वामी, आदर्श आध्यात्मिक गुरु।
