साधारण जीव की अशुद्ध अवस्था में, उसकी विभिन्न इन्द्रियाँ पूर्ण रूप से सांसारिक मामलों में लगी रहती हैं। यदि भगद्गीता या श्रीमद्भगवतम से उनके बारे में सुनने में कान भगवान की सेवा में नहीं लगे हैं, तो निश्चित रूप से कान के छेद किसी कूड़े से भरे होंगे। इसलिए भगवद्गीता और श्रीमद्भगवतम् के संदेशों को पूरे विश्व में बहुत ऊँचे स्वर से प्रचारित किया जाना चाहिए। यह एक शुद्ध भक्त का कर्तव्य है जो वास्तव में उन्हें सही स्रोतों से सुन चुका है। बहुत से लोग दूसरों से कुछ कहना चाहते हैं, लेकिन क्योंकि उन्हें वैदिक ज्ञान के विषय पर बोलने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जाता है, वे सभी बकवास बोल रहे हैं, और लोग इसे बिना किसी समझ के स्वीकार कर रहे हैं। दुनिया के सांसारिक समाचारों को वितरित करने के लिए सैकड़ों और हजारों स्रोत हैं, और दुनिया के लोग भी उन्हें प्राप्त कर रहे हैं। इसी प्रकार, दुनिया के लोगों को भगवान के आध्यात्मिक विषयों को सुनने के लिए सिखाया जाना चाहिए, और भगवान के भक्त को इतनी ऊँची आवाज़ से बोलना चाहिए कि वे सुन सकें। मेंढक जोर-जोर से टर्राते हैं, जिसके परिणामस्वरूप वे सांपों को उन्हें खाने के लिए आमंत्रित करते हैं। मानवीय जीभ को विशेष रूप से वैदिक मंत्रों का उच्चारण करने के लिए दिया गया है न कि मेंढकों की तरह टर्राने के लिए। इस श्लोक में प्रयुक्त असती शब्द भी महत्वपूर्ण है। असती का अर्थ है वह स्त्री जो वेश्या बन गई है। एक वेश्या की अच्छी स्त्रैण गुणों के लिए कोई प्रतिष्ठा नहीं होती। उसी प्रकार, वह जीभ, जो मनुष्य को वैदिक मंत्रों का उच्चारण करने के लिए दी जाती है, को भौतिक बकवास का उच्चारण करने में लगाने पर वेश्या माना जाएगा।
