श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 10: भागवत सभी प्रश्नों का उत्तर है  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.10.9 
एकमेकतराभावे यदा नोपलभामहे ।
त्रितयं तत्र यो वेद स आत्मा स्वाश्रयाश्रय: ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
विभिन्न जीवों के ये तीनों अवस्था आपस में निर्भर हैं। एक के बिना दूसरे को समझा नहीं जा सकता। किन्तु परमेश्वर इन्हें एक-दूसरे के सहारे मानकर इन सभी से स्वतंत्र है, इसलिए वह परम आश्रय है।
 
विभिन्न जीवों के ये तीनों अवस्था आपस में निर्भर हैं। एक के बिना दूसरे को समझा नहीं जा सकता। किन्तु परमेश्वर इन्हें एक-दूसरे के सहारे मानकर इन सभी से स्वतंत्र है, इसलिए वह परम आश्रय है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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