श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 10: भागवत सभी प्रश्नों का उत्तर है  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.10.51 
सूत उवाच
राज्ञा परीक्षिता पृष्टो यदवोचन्महामुनि: ।
तद्वोऽभिधास्ये श‍ृणुत राज्ञ: प्रश्नानुसारत: ॥ ५१ ॥
 
 
अनुवाद
श्री सूत गोस्वामी ने बताया - अब मैं तुम्हें वे सारे विषय बताऊँगा जिन्हें राजा परीक्षित ने पूछा था और महा-मुनि ने उनसे कहा था। कृपया आप ध्यानपूर्वक सुनें।
 
Srisut Goswami said—Now I will tell you all the topics which the Maha-Muni told King Parikshit when he asked about them. Please listen to them carefully.
तात्पर्य
किसी भी प्रश्न का उत्तर किसी शास्त्र के द्वारा उद्धृत करके दिया जा सकता है, और वह उत्तर सभी समझदार लोगों को संतुष्ट कर देता है। यही नियम तो न्यायालय में भी है। बिना ज्यादा परेशानी लिए सर्वश्रेष्ठ वकील अपने मुकदमे को जीतने के लिए कोर्ट के द्वारा दिए पुराने फैसलों से ही सबूत पेश करते हैं। इसे परंपरा प्रणाली कहा जाता है, और विद्वान लोग बिना मनगढ़ंत व्याख्याएं किए इसका पालन करते हैं।

īśvaraḥ paramaḥ kṛṣṇaḥ

sac-cid-ānanda-vigrahaḥ

anādir ādir govindaḥ

sarva-kāraṇa-kāraṇam

(ब्रह्म-संहिता. 5.1)

आइए हम सब सर्वोच्च भगवान के आदेश का पालन करें, जिनका हाथ बिना अपवाद, हर चीज में है।

 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दो के अंतर्गत दसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)