अवतारानुचरितं हरेश्चास्यानुवर्तिनाम् ।
पुंसामीशकथा: प्रोक्ता नानाख्यानोपबृंहिता: ॥ ५ ॥
अनुवाद
ईश-कथा श्री भगवान के विविध अवतारों और उनकी लीलाओं के साथ-साथ उनके परम भक्तों के कार्यकलापों का वर्णन करती है।
Theology (Ish-katha) describes the various incarnations of Sri Bhagavan, His pastimes as well as the activities of His devotees.
तात्पर्य
ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति के अस्तित्व के दौरान, इतिहास का कालक्रम बनाया गया है, जो जीवित संस्थाओं की गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है। सामान्य तौर पर लोगों की प्रवृत्ति होती है कि वे विभिन्न पुरुषों और समय के इतिहास और कथनों को सीखें, लेकिन ईश्वर-तत्व के विज्ञान में ज्ञान की कमी के कारण वे ईश्वर-तत्व के व्यक्तित्व के अवतारों के इतिहास का अध्ययन करने के योग्य नहीं होते हैं। यह हमेशा याद रखना चाहिए कि भौतिक सृष्टि की रचना बद्ध आत्माओं के उद्धार के लिए की गई है। दयालु भगवान, अपनी अकारण दया से, भौतिक दुनिया के विभिन्न ग्रहों पर उतरते हैं और बद्ध आत्माओं के उद्धार के लिए कार्य करते हैं। यही इतिहास और कथनों को पढ़ने लायक बनाता है। श्रीमद्-भागवतम भगवान के ऐसे दिव्य विषयों को महान भक्तों के साथ संबंध में प्रस्तुत करता है। इसलिए भक्तों और भगवान के विषयों को श्रद्धापूर्वक श्रवण करना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥