श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 10: भागवत सभी प्रश्नों का उत्तर है  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.10.48 
शौनक उवाच
यदाह नो भवान् सूत क्षत्ता भागवतोत्तम: ।
चचार तीर्थानि भुवस्त्यक्त्वा बन्धून् सुदुस्त्यजान् ॥ ४८ ॥
 
 
अनुवाद
सृष्टि की उत्पत्ति की कथा सुनने के पश्चात शौनक ऋषि ने सूत गोस्वामी से विदुर के विषय में पूछा, क्योंकि सूत गोस्वामी ने पहले ही उन्हें यह बता रखा था कि विदुर ने अपने परिवार को छोड़कर, जिनसे विरह सहना बहुत कठिन होता है, किस प्रकार गृहत्याग कर दिया था।
 
After hearing all this about the creation, Sage Shaunak asked Suta Goswami about Vidura, because Suta Goswami had already told him how Vidura had renounced his home leaving behind his relatives, whom it is very difficult to leave.
तात्पर्य
विदुर के बारे मे जानने को तेज़ी से आतुर थे षुणक के नेतृत्व में ऋषिगण, जो तीर्थयात्रा के स्थलोंपर यात्रा कर रहे थे, मैत्रेय ऋषि से मिले।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)