श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 10: भागवत सभी प्रश्नों का उत्तर है  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.10.45 
नास्य कर्मणि जन्मादौ परस्यानुविधीयते ।
कर्तृत्वप्रतिषेधार्थं माययारोपितं हि तत् ॥ ४५ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान द्वारा भौतिक जगत की सृष्टि और विनाश के लिए कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं किया जाता है। वेदों में उनके प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के बारे में जो कुछ वर्णित है, वह इस विचार का निराकरण करने के लिए है कि भौतिक प्रकृति ही ब्रह्मांड की सृजनकर्ता है।
 
भगवान द्वारा भौतिक जगत की सृष्टि और विनाश के लिए कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं किया जाता है। वेदों में उनके प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के बारे में जो कुछ वर्णित है, वह इस विचार का निराकरण करने के लिए है कि भौतिक प्रकृति ही ब्रह्मांड की सृजनकर्ता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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