भक्त्या मामभिजानाति
यावान यश्चास्मि तत्त्वतः
ततो मामतत्त्वतो ज्ञात्वा
विशते तदनंतरम्
शुद्ध भक्ति सेवा के विकास से कोई भी भगवान को वास्तव में वैसा ही जान सकता है जैसा वे हैं और इस प्रकार भगवान की वास्तविक सेवा में प्रशिक्षित होता है और उसे भगवान के साथ सीधे इतने प्रकार से जुड़ने की अनुमति मिल जाती है। भगवान के साथ सर्वश्रेष्ठ गौरवशाली जुड़ाव गोलोक वृंदावन ग्रह में संभव हो पाता है, जहाँ भगवान कृष्ण गोपियों और उनके पसंदीदा जानवरों, सुराभि गायों के साथ स्वयं आनंद लेते हैं। कृष्ण की इस पारलौकिक भूमि का वर्णन ब्रह्म-संहिता में दिया गया है, जिसे भगवान श्री चैतन्य इस संबंध में सबसे प्रामाणिक साहित्य मानते हैं।
