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श्लोक 2.10.43  |
तत: कालाग्निरुद्रात्मा यत्सृष्टमिदमात्मन: ।
संनियच्छति तत् काले घनानीकमिवानिल: ॥ ४३ ॥ |
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| अनुवाद |
| इसके पश्चात युग के अंत में स्वयं भगवान रुद्र के रूप में संहारक होकर सृष्टि का अंत करेंगे जैसे वायु बादलों को हटा देती है। |
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| इसके पश्चात युग के अंत में स्वयं भगवान रुद्र के रूप में संहारक होकर सृष्टि का अंत करेंगे जैसे वायु बादलों को हटा देती है। |
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