सर्व-योनिषु काउन्तेय
मूर्तयः संभवन्ति याः
तसाम् ब्रह्म महाद् योनिर्
अहम् बीज-प्रदः पिता
भौतिक प्रकृति की तुलना माँ से की जाती है। यद्यपि हर जीव को माँ के शरीर से बाहर आते हुए देखा जाता है, फिर भी यह एक तथ्य है कि माँ इस जन्म का अंतिम कारण नहीं है। जन्म का अंतिम कारण पिता है। पिता के बीज के बिना, कोई भी माँ बच्चे को जन्म नहीं दे सकती है। इसलिए असंख्य ब्रह्मांडों में विभिन्न रूपों और स्थितियों में रहने वाले जीव सभी सर्वशक्तिमान पिता, भगवान की सर्वोच्च शख्सियत के बीजों से पैदा हुए हैं, और केवल कम ज्ञान वाले लोगों को वे भौतिक प्रकृति से पैदा हुए हुए प्रतीत होते हैं। भगवान की भौतिक ऊर्जा के अधीन होने के कारण, ब्रह्मा से लेकर एक मामूली चींटी तक सभी जीव अपने पिछले कर्मों के अनुसार विभिन्न शरीरों में प्रकट होते हैं।
भौतिक प्रकृति भगवान की ऊर्जाओं में से एक है (भगवद गीता 7.4)। भौतिक प्रकृति श्रेष्ठ प्रकृति से कम है, जो जीवित प्राणी हैं। भगवान की श्रेष्ठ और निम्न प्रकृति सभी वैश्विक मामलों को प्रकट करने के लिए संयुक्त रूप से प्रकट होती हैं।
जीवन की कुछ स्थितियों में जीव अपेक्षाकृत खुश हैं, जबकि अन्य जीवन की दुखद स्थितियों में हैं। लेकिन वास्तव में, उनमें से कोई भी भौतिक सशर्त जीवन में वास्तव में खुश नहीं है। कोई भी जेल जीवन में खुश नहीं हो सकता है, भले ही वह पहले दर्जे का कैदी हो और दूसरा तीसरे दर्जे का कैदी हो। बुद्धिमान व्यक्ति को तीसरे दर्जे की जेल के जीवन से पहले दर्जे की जेल के जीवन में पदोन्नत होने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि जेल से पूरी तरह से रिहा होने की कोशिश करनी चाहिए। किसी को पहले दर्जे के कैदी के रूप में पदोन्नत किया जा सकता है, लेकिन वही पहले दर्जे का कैदी अगले कार्यकाल में फिर से तीसरे दर्जे के कैदी के रूप में अपमानित हो जाता है। व्यक्ति को जेल जीवन से मुक्त होने और भगवान के पास घर वापस जाने का प्रयास करना चाहिए। यह सभी प्रकार के जीवों के लिए वास्तविक लक्ष्य है।
