श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 10: भागवत सभी प्रश्नों का उत्तर है  »  श्लोक 37-40
 
 
श्लोक  2.10.37-40 
प्रजापतीन्मनून् देवानृषीन् पितृगणान् पृथक् ।
सिद्धचारणगन्धर्वान् विद्याध्रासुरगुह्यकान् ॥ ३७ ॥
किन्नराप्सरसो नागान् सर्पान् किम्पुरुषान्नरान् ।
मातृ रक्ष:पिशाचांश्च प्रेतभूतविनायकान् ॥ ३८ ॥
कूष्माण्डोन्मादवेतालान् यातुधानान् ग्रहानपि ।
खगान्मृगान् पशून् वृक्षान् गिरीन्नृप सरीसृपान् ॥ ३९ ॥
द्विविधाश्चतुर्विधा येऽन्ये जलस्थलनभौकस: ।
कुशलाकुशला मिश्रा: कर्मणां गतयस्त्विमा: ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन्, मुझसे जान लो कि सभी जीवों को उनके पिछले कर्मों के अनुसार परमेश्वर ने बनाया है। इसमें ब्रह्मा और उनके पुत्र जैसे दक्ष, वैवस्वत मनु जैसे समय-समय पर प्रमुख, इंद्र, चंद्र और वरुण जैसे देवता, भृगु, व्यास और वसिष्ठ जैसे महर्षि, पितरलोक और सिद्धलोक के निवासी, चारण, गंधर्व, विद्याधर, असुर, यक्ष, किन्नर और देवदूत, नाग, बंदर जैसे किन्नर, मनुष्य, मातृलोक के निवासी, असुर, पिशाच, भूत-प्रेत, पागल, शुभ-अशुभ नक्षत्र, विनायक, जंगली पशु, पक्षी, पालतू पशु, सरीसृप, पहाड़, चलने-फिरने वाले और स्थिर जीव, भ्रूण से पैदा होने वाले जीव, अंडों से पैदा होने वाले जीव, पसीने से पैदा होने वाले जीव और बीज से पैदा होने वाले जीव, और अन्य सभी जीव, चाहे वे पानी में हों, जमीन पर हों या आकाश में हों, सुख में हों, दुख में हों या सुख-दुख में मिश्रित हों। ये सभी अपने पिछले कर्मों के अनुसार परमेश्वर द्वारा बनाए गए हैं।
 
O King, know from me that all living entities are created by the Supreme Lord according to their misfortunes. These include Brahma and his sons like Daksha, contemporary heads like Vaivasvat Manu, demigods like Indra, Chandra and Varuna, great sages like Bhrigu, Vyasa, Vasishtha, residents of Pitrloka and Siddhaloka, Charanas, Gandharvas, Vidyadharas, Asuras, Yakshas, ​​Kinnars and angels, serpents, monkeys like Kimpurushas, ​​human beings, residents of Matriloka, Asuras, Pishachas, ghosts and spirits, madmen, auspicious and inauspicious stars, Vinayaka, wild animals, birds, domestic animals, reptiles, mountains, living and non-living beings, viviparous, oviparous, sweating and plant-born beings and all other happy, unhappy or mixed happy and unhappy beings of water, land or sky. All these are created by the Supreme Lord according to their previous deeds.
तात्पर्य
इस सूची में जीवों की विभिन्न प्रजातियों का उल्लेख है, और ब्रह्मांड के सबसे ऊपरी ग्रह से लेकर सबसे निचले ग्रह तक, सभी जीवित प्रजातियों को सर्वशक्तिमान पिता विष्णु ने बनाया है। इसलिए कोई भी भगवान की सर्वोच्च शख्सियत से स्वतंत्र नहीं है। भगवद-गीता (14.4) में भगवान ने निम्नलिखित श्लोक में सभी जीवों को अपनी संतान होने का दावा किया है:

सर्व-योनिषु काउन्तेय

मूर्तयः संभवन्ति याः

तसाम् ब्रह्म महाद् योनिर्

अहम् बीज-प्रदः पिता

भौतिक प्रकृति की तुलना माँ से की जाती है। यद्यपि हर जीव को माँ के शरीर से बाहर आते हुए देखा जाता है, फिर भी यह एक तथ्य है कि माँ इस जन्म का अंतिम कारण नहीं है। जन्म का अंतिम कारण पिता है। पिता के बीज के बिना, कोई भी माँ बच्चे को जन्म नहीं दे सकती है। इसलिए असंख्य ब्रह्मांडों में विभिन्न रूपों और स्थितियों में रहने वाले जीव सभी सर्वशक्तिमान पिता, भगवान की सर्वोच्च शख्सियत के बीजों से पैदा हुए हैं, और केवल कम ज्ञान वाले लोगों को वे भौतिक प्रकृति से पैदा हुए हुए प्रतीत होते हैं। भगवान की भौतिक ऊर्जा के अधीन होने के कारण, ब्रह्मा से लेकर एक मामूली चींटी तक सभी जीव अपने पिछले कर्मों के अनुसार विभिन्न शरीरों में प्रकट होते हैं।

भौतिक प्रकृति भगवान की ऊर्जाओं में से एक है (भगवद गीता 7.4)। भौतिक प्रकृति श्रेष्ठ प्रकृति से कम है, जो जीवित प्राणी हैं। भगवान की श्रेष्ठ और निम्न प्रकृति सभी वैश्विक मामलों को प्रकट करने के लिए संयुक्त रूप से प्रकट होती हैं।

जीवन की कुछ स्थितियों में जीव अपेक्षाकृत खुश हैं, जबकि अन्य जीवन की दुखद स्थितियों में हैं। लेकिन वास्तव में, उनमें से कोई भी भौतिक सशर्त जीवन में वास्तव में खुश नहीं है। कोई भी जेल जीवन में खुश नहीं हो सकता है, भले ही वह पहले दर्जे का कैदी हो और दूसरा तीसरे दर्जे का कैदी हो। बुद्धिमान व्यक्ति को तीसरे दर्जे की जेल के जीवन से पहले दर्जे की जेल के जीवन में पदोन्नत होने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि जेल से पूरी तरह से रिहा होने की कोशिश करनी चाहिए। किसी को पहले दर्जे के कैदी के रूप में पदोन्नत किया जा सकता है, लेकिन वही पहले दर्जे का कैदी अगले कार्यकाल में फिर से तीसरे दर्जे के कैदी के रूप में अपमानित हो जाता है। व्यक्ति को जेल जीवन से मुक्त होने और भगवान के पास घर वापस जाने का प्रयास करना चाहिए। यह सभी प्रकार के जीवों के लिए वास्तविक लक्ष्य है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)