श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 10: भागवत सभी प्रश्नों का उत्तर है  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.10.3 
भूतमात्रेन्द्रियधियां जन्म सर्ग उदाहृत: ।
ब्रह्मणो गुणवैषम्याद्विसर्ग: पौरुष: स्मृत: ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
सोलह पदार्थों की प्रारंभिक सृष्टि — अर्थात् पाँच तत्व (अग्नि, जल, धरती, वायु और आकाश), ध्वनि, आकार, स्वाद, गंध, स्पर्श, और आँखें, कान, नाक, जीभ, त्वचा और मन — को सर्ग के रूप में जाना जाता है, जबकि इसके बाद भौतिक प्रकृति की विधियों की परिणामी बातचीत को विसर्ग कहा जाता है।
 
सोलह पदार्थों की प्रारंभिक सृष्टि — अर्थात् पाँच तत्व (अग्नि, जल, धरती, वायु और आकाश), ध्वनि, आकार, स्वाद, गंध, स्पर्श, और आँखें, कान, नाक, जीभ, त्वचा और मन — को सर्ग के रूप में जाना जाता है, जबकि इसके बाद भौतिक प्रकृति की विधियों की परिणामी बातचीत को विसर्ग कहा जाता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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