श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 10: भागवत सभी प्रश्नों का उत्तर है  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.10.22 
बोध्यमानस्य ऋषिभिरात्मनस्तज्जिघृक्षत: ।
कर्णौ च निरभिद्येतां दिश: श्रोत्रं गुणग्रह: ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
महान ऋषियों की जानने की इच्छा विकसित होने से कान, सुनने की शक्ति, सुनने के अधिष्ठाता देवता और सुनने की वस्तुओं का प्रकटीकरण हुआ। ऋषिगण आत्मा के बारे में सुनना चाह रहे थे।
 
महान ऋषियों की जानने की इच्छा विकसित होने से कान, सुनने की शक्ति, सुनने के अधिष्ठाता देवता और सुनने की वस्तुओं का प्रकटीकरण हुआ। ऋषिगण आत्मा के बारे में सुनना चाह रहे थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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