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श्लोक 2.10.19  |
विवक्षोर्मुखतो भूम्नो वह्निर्वाग् व्याहृतं तयो: ।
जले चैतस्य सुचिरं निरोध: समजायत ॥ १९ ॥ |
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| अनुवाद |
| जब परम पिता बोले तो मुँह से वाणी उभरी। फिर मुँह से देव अग्नि निर्मित हुए। पर जब वो जल में लेटे तब ये सब कार्य बंद पड़ गये। |
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| जब परम पिता बोले तो मुँह से वाणी उभरी। फिर मुँह से देव अग्नि निर्मित हुए। पर जब वो जल में लेटे तब ये सब कार्य बंद पड़ गये। |
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