द्वे जानुनी सुतलं विश्वमूर्ते-
रूरुद्वयं वितलं चातलं च ।
महीतलं तज्जघनं महीपते
नभस्तलं नाभिसरो गृणन्ति ॥ २७ ॥
अनुवाद
विश्वरूप के घुटने सुतल लोक होते हैं, और उसकी दो जाँघें वितल और अतल लोक हैं। कूल्हे महीतल लोक हैं, और उसका नाभि का गड्डा बाहरी अंतरिक्ष है।
The knees of the Vishwa-roop are the world called Sutala and both the thighs are Vitala and Atala worlds. The waist region is the earth and the pit of his navel is the outer space.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥