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bhagavat 12.9.4: ऋषि बोले : हे देवताओं के देव, आपको नमन। हे अच्युत, जो भक्त आपकी शरण में आते हैं, आप उनके सारे कष्ट दूर कर देते हैं। मैंने जो आपका दर्शन किया है, यही मेरे लिए सबसे बड़ा वरदान है।   |   bhagavat अध्याय 12.9: मार्कण्डेय ऋषि को भगवान् की मायाशक्ति के दर्शन   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 9: मार्कण्डेय ऋषि को भगवान् की मायाशक्ति के दर्शन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.9.4 
श्रीऋषिरुवाच
जितं ते देवदेवेश प्रपन्नार्तिहराच्युत ।
वरेणैतावतालं नो यद् भवान् समद‍ृश्यत ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
ऋषि बोले : हे देवताओं के देव, आपको नमन। हे अच्युत, जो भक्त आपकी शरण में आते हैं, आप उनके सारे कष्ट दूर कर देते हैं। मैंने जो आपका दर्शन किया है, यही मेरे लिए सबसे बड़ा वरदान है।
 
The sage said: O lord of gods, all glory to you. O Achyuta, you remove all the sufferings of those devotees who surrender to you. You have allowed me to see you, this is the boon I desired.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)