Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.9.27: तब उस नवजात शिशु ने श्वास ली जिससे मार्कण्डेय मच्छर की तरह उसके शरीर के अंदर समा गए। वहाँ ऋषि ने देखा कि प्रलय के पहले जिस तरह ब्रह्माण्ड था, उसी तरह अब भी मौजूद है। यह देखकर मार्कण्डेय अत्यधिक आश्चर्यचकित और विस्मित हो गए। | bhagavat अध्याय 12.9: मार्कण्डेय ऋषि को भगवान् की मायाशक्ति के दर्शन । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब उस नवजात शिशु ने श्वास ली जिससे मार्कण्डेय मच्छर की तरह उसके शरीर के अंदर समा गए। वहाँ ऋषि ने देखा कि प्रलय के पहले जिस तरह ब्रह्माण्ड था, उसी तरह अब भी मौजूद है। यह देखकर मार्कण्डेय अत्यधिक आश्चर्यचकित और विस्मित हो गए।
Then the child breathed and Mārkaṇḍeya was drawn into his body like a mosquito. There the sage found the entire universe in order in the state it was in before the deluge. Mārkaṇḍeya was extremely surprised and fascinated to see this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥