जैसे ही मार्कण्डेय ने उस बालक को देखा, उनकी सारी थकान दूर हो गई। निश्चय ही उन्हें इतना अधिक आनंद हुआ कि उनके हृदय रूपी कमल और उनके कमल रूपी नेत्र पूर्ण रूप से प्रसन्नता से खिल उठे और उनके रोम-रोम खड़े हो गए। उस दिव्य शिशु की अद्भुत पहचान से विचलित होकर ऋषि उनके पास पहुँचे।
As soon as Markandeya saw the child, all his tiredness vanished. He was so happy that his heart and eyes blossomed like lotus and he felt thrilled. The sages, who were suspicious about the strange identity of this child, went to him.
तात्पर्य
मार्कंडेय उस बालक से उसकी पहचान के बारे में पूछना चाहते थे और इसलिए वे उसके पास गए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥