महामरकतश्यामं श्रीमद्वदनपङ्कजम् ।
कम्बुग्रीवं महोरस्कं सुनसं सुन्दरभ्रुवम् ॥ २२ ॥
श्वासैजदलकाभातं कम्बुश्रीकर्णदाडिमम् ।
विद्रुमाधरभासेषच्छोणायितसुधास्मितम् ॥ २३ ॥
पद्मगर्भारुणापाङ्गं हृद्यहासावलोकनम् ।
श्वासैजद्वलिसंविग्ननिम्ननाभिदलोदरम् ॥ २४ ॥
चार्वङ्गुलिभ्यां पाणिभ्यामुन्नीय चरणाम्बुजम् ।
मुखे निधाय विप्रेन्द्रो धयन्तं वीक्ष्य विस्मित: ॥ २५ ॥
अनुवाद
बालक का गहरा नीला रंग निर्मल मरकत जैसा था; उसका कमल जैसा चेहरा अनमोल सौंदर्य से चमक रहा था और उसके गले में शंख जैसी रेखाएँ थीं। उसकी छाती चौड़ी थी, उसकी नाक सुंदर आकार की थी, उसकी भौहें सुंदर थीं और उसके कान अनार के फूलों जैसे सुंदर थे जिसके अंदर के हिस्से शंख के मुड़ने जैसे थे। उसकी आँखों के कोने कमल के गर्भ की तरह लाल थे और उसके मूँगे जैसे होठों का तेज उसके चेहरे की अमृत जैसी मनमोहक मुस्कान को हल्का लाल रंग दे रहा था। जब वह सांस लेता था, तो उसके सुंदर बाल हिलते थे और उसकी गहरी नाभि उसके पेट की चमड़ी के हिलते हुए वलनों से विकृत हो जाती थी, जो बरगद के पत्ते की तरह लग रहा था। वह महान ब्राह्मण आश्चर्य से उस बालक को देख रहा था, जो अपने एक कमल जैसे पैर को अपनी कोमल अंगुलियों से पकड़कर अपने मुँह में डालकर चूस रहा था।
The child's deep blue complexion was like a spotless emerald; his lotus face shone with immense beauty and his neck had conch-like lines. He had a broad chest, a beautifully shaped nose, beautiful eyebrows and ears like pomegranate flowers with folds inside like the folds of a conch. The corners of his eyes were red like the lotus lobes and the lustre of his pearl-like lips made the sweet, charming smile on his face redder. When he breathed, his beautiful hair moved and the deep navel was distorted by the moving folds of the skin of his abdomen like a banyan leaf. The great Brahmin was looking with wonder at the child who was holding one of his lotus feet with his beautiful fingers and putting it in his mouth and sucking it.
तात्पर्य
अति छोटा बालक भगवान उस सर्वोच्च देवाधिदेव व्यक्तित्व का स्वरूप था। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर के अनुसार, भगवान कृष्ण ने मन ही मन सोचा, "अनेक भक्तजन मेरे चरण कमलों के अमृत के लिए लालायित है। इसलिए मेरे अपने उस अमृत का अनुभव स्वयं ही कर लेना चाहिए। इस प्रकार साधारण शिशु के समान लीला करते हुए भगवान ने अपने पंजों को चूसना आरंभ कर दिया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥