Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.9.2: भगवान ने कहा: हे मार्कण्डेय, तुम वास्तव में सभी विद्वान ब्राह्मणों में श्रेष्ठ हो। तुमने परमात्मा पर ध्यान लगाकर और अपनी अटल भक्ति, अपनी साधना, अपने वेदों के अध्ययन और नियमों के प्रति अपने पालन को मेरे ऊपर केंद्रित करके अपने जीवन को सफल बना लिया है। | bhagavat अध्याय 12.9: मार्कण्डेय ऋषि को भगवान् की मायाशक्ति के दर्शन । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीभगवानुवाच
भो भो ब्रह्मर्षिवर्योऽसि सिद्ध आत्मसमाधिना ।
मयि भक्त्यानपायिन्या तप:स्वाध्यायसंयमै: ॥ २ ॥
अनुवाद
भगवान ने कहा: हे मार्कण्डेय, तुम वास्तव में सभी विद्वान ब्राह्मणों में श्रेष्ठ हो। तुमने परमात्मा पर ध्यान लगाकर और अपनी अटल भक्ति, अपनी साधना, अपने वेदों के अध्ययन और नियमों के प्रति अपने पालन को मेरे ऊपर केंद्रित करके अपने जीवन को सफल बना लिया है।
The Lord said: O Markandeya, you are indeed the best of all learned brahmanas. By fixing your attention on the Supreme Being and by focusing on Me your unwavering devotion, your austerities, your study of the Vedas and your readiness for the rites and ceremonies, you have made your life successful.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥