हमारी भावुक और अज्ञानी गतिविधियाँ हमारे लिए और दूसरों के लिए बहुत अधिक कष्ट, भ्रम और भय का कारण बनती हैं; इसलिए उन्हें छोड़ देना चाहिए। व्यक्ति को सदाचार के मार्ग में दृढ़ता से स्थित होना चाहिए और आध्यात्मिक प्लेटफ़ॉर्म पर शांतिपूर्वक जीवन जीना चाहिए। अच्छाई का सार सभी गतिविधियों में स्वार्थी हित का त्याग करना है और इस तरह अपने संपूर्ण अस्तित्व को सर्वोच्च अस्तित्व, भगवान कृष्ण को समर्पित करना है, जो हमारे अस्तित्व के स्रोत हैं।
