Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.8.42: क्योंकि आप सभी चर और अचर प्राणियों के रक्षक और परम नियंत्रक हैं, जो भी आपके चरणकमलों में शरण लेता है उसे भौतिक कर्म, भौतिक गुण या समय का दाग छू नहीं पाता। वे महर्षि जो वेदों के अर्थ को आत्मसात कर चुके हैं, आपकी स्तुति करते हैं। आपका सान्निध्य प्राप्त करने के लिए, वे हर अवसर पर आपको नमन करते हैं, निरंतर आपकी पूजा और ध्यान करते हैं। | bhagavat अध्याय 12.8: मार्कण्डेय द्वारा नर-नारायण ऋषि की स्तुति । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्योंकि आप सभी चर और अचर प्राणियों के रक्षक और परम नियंत्रक हैं, जो भी आपके चरणकमलों में शरण लेता है उसे भौतिक कर्म, भौतिक गुण या समय का दाग छू नहीं पाता। वे महर्षि जो वेदों के अर्थ को आत्मसात कर चुके हैं, आपकी स्तुति करते हैं। आपका सान्निध्य प्राप्त करने के लिए, वे हर अवसर पर आपको नमन करते हैं, निरंतर आपकी पूजा और ध्यान करते हैं।
Since You are the protector and the supreme controller of all animate and inanimate beings, whoever surrenders to Your feet cannot be touched by material activities, material qualities or the contamination of time. The great sages who have internalized the meaning of the Vedas offer their prayers to You. They bow down to You on every occasion to attain Your proximity, constantly worship You and meditate on You.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥