Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.8.37: सम्मान में हाथ जोड़े खड़े होकर तथा दीनतावश अपना सिर झुकाये मार्कण्डेय इतने उत्सुक थे कि उन्हें लगा जैसे वे दोनों ईश्वरों से लिपट रहे हैं। खुशी से रुद्ध हुई वाणी से उन्होंने बार-बार कहा "मैं आपको नमन करता हूँ।" | bhagavat अध्याय 12.8: मार्कण्डेय द्वारा नर-नारायण ऋषि की स्तुति । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सम्मान में हाथ जोड़े खड़े होकर तथा दीनतावश अपना सिर झुकाये मार्कण्डेय इतने उत्सुक थे कि उन्हें लगा जैसे वे दोनों ईश्वरों से लिपट रहे हैं। खुशी से रुद्ध हुई वाणी से उन्होंने बार-बार कहा "मैं आपको नमन करता हूँ।"
Standing with folded hands in respect and his head bowed in humility, Markandeya was so curious that he thought he was embracing both the gods. With a voice choked with joy, he repeatedly said, “I offer my respectful obeisances unto you.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥