Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.8.36: उन्हें देखने से उत्पन्न हुए हर्ष और भावविभोरता ने मार्कण्डेय के शरीर, मन और इन्द्रियों को संतुष्ट कर दिया था और उनके शरीर पर रोमांच हो आया था और उनकी आँखों से आँसू छलक पड़े थे। भावनाओं से अभिभूत होकर मार्कण्डेय के लिए उन्हें देखना मुश्किल हो रहा था। | bhagavat अध्याय 12.8: मार्कण्डेय द्वारा नर-नारायण ऋषि की स्तुति । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तत्सन्दर्शनानन्दनिर्वृतात्मेन्द्रियाशय: ।
हृष्टरोमाश्रुपूर्णाक्षो न सेहे तावुदीक्षितुम् ॥ ३६ ॥
अनुवाद
उन्हें देखने से उत्पन्न हुए हर्ष और भावविभोरता ने मार्कण्डेय के शरीर, मन और इन्द्रियों को संतुष्ट कर दिया था और उनके शरीर पर रोमांच हो आया था और उनकी आँखों से आँसू छलक पड़े थे। भावनाओं से अभिभूत होकर मार्कण्डेय के लिए उन्हें देखना मुश्किल हो रहा था।
The joy of seeing them completely satisfied Markandeya's body, mind and senses and sent thrills through his body and filled his eyes with tears. Markandeya was unable to look at them due to his emotional state.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥