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bhagavat 12.8.33-34: उनमें से एक का रंग सफ़ेद था और दूसरे का काला था, और दोनों के चार-चार हाथ थे। उनकी आँखें खिलते हुए कमल के फूलों की पंखुड़ियों की तरह थीं और उन्होंने काले मृग के चमड़े और छाल के कपड़े पहने हुए थे, साथ ही तीन तारों वाला पवित्र धागा भी था। उनके हाथों में, जो सबसे अधिक शुद्ध करने वाले थे, उन्होंने भिक्षाटन का कलश, सीधा बाँस का डंडा और कमल के बीज की माला, साथ ही दर्भ घास के पुंजों के प्रतीकात्मक रूप में सभी को शुद्ध करने वाले वेदों को भी धारण किया हुआ था। उनका कद लम्बा था और उनकी पीली चमक चमकती बिजली के रंग की थी। वे साक्षात् तपस्या की मूर्ति के रूप में प्रकट हुए थे और अग्रणी देवताओं द्वारा पूजे जा रहे थे।   |   bhagavat अध्याय 12.8: मार्कण्डेय द्वारा नर-नारायण ऋषि की स्तुति   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 8: मार्कण्डेय द्वारा नर-नारायण ऋषि की स्तुति  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  12.8.33-34 
तौ शुक्लकृष्णौ नवकञ्जलोचनौ
चतुर्भुजौ रौरववल्कलाम्बरौ ।
पवित्रपाणी उपवीतकं त्रिवृत्
कमण्डलुं दण्डमृजुं च वैणवम् ॥ ३३ ॥
पद्माक्षमालामुत जन्तुमार्जनं
वेदं च साक्षात्तप एव रूपिणौ ।
तपत्तडिद्वर्णपिशङ्गरोचिषा
प्रांशू दधानौ विबुधर्षभार्चितौ ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
उनमें से एक का रंग सफ़ेद था और दूसरे का काला था, और दोनों के चार-चार हाथ थे। उनकी आँखें खिलते हुए कमल के फूलों की पंखुड़ियों की तरह थीं और उन्होंने काले मृग के चमड़े और छाल के कपड़े पहने हुए थे, साथ ही तीन तारों वाला पवित्र धागा भी था। उनके हाथों में, जो सबसे अधिक शुद्ध करने वाले थे, उन्होंने भिक्षाटन का कलश, सीधा बाँस का डंडा और कमल के बीज की माला, साथ ही दर्भ घास के पुंजों के प्रतीकात्मक रूप में सभी को शुद्ध करने वाले वेदों को भी धारण किया हुआ था। उनका कद लम्बा था और उनकी पीली चमक चमकती बिजली के रंग की थी। वे साक्षात् तपस्या की मूर्ति के रूप में प्रकट हुए थे और अग्रणी देवताओं द्वारा पूजे जा रहे थे।
 
One of them was fair and the other dark and both had four arms. Their eyes were like open lotus leaves and they wore dark deerskin and bark clothes and a three-strand sacred thread. They held in their purifying hands the ascetic's water pot, a straight bamboo stick and a rosary of lotus seeds and the Vedas, which purify all, in the form of bunches of Darbha. They were tall and their pale radiance was the colour of lightning. They appeared as the very embodiment of penance and were worshipped by the leading gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)