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श्रीमद् भागवतम
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स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग
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अध्याय 7: पौराणिक साहित्य
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श्लोक 5
श्लोक
12.7.5
त्रय्यारुणि: कश्यपश्च सावर्णिरकृतव्रण: ।
वैशम्पायनहारीतौ षड् वै पौराणिका इमे ॥ ५ ॥
अनुवाद
त्रय्यारुणि, कश्यप, सावर्णि, अकृतव्रण, वैशम्पायन और हारीत छहों पुराणों के ज्ञाता हैं।
Trayyaruni, Kashyap, Savarni, Akritavran, Vaishampayan and Harit – these are the teachers of the six Puranas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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