श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 7: पौराणिक साहित्य  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.7.4 
नक्षत्रकल्प: शान्तिश्च कश्यपाङ्गिरसादय: ।
एते आथर्वणाचार्या: श‍ृणु पौराणिकान् मुने ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
नक्षत्रकल्प, शांतिकल्प, कश्यप, आंगिरस और अन्य भी अथर्ववेद के आचार्यों में से थे। हे मुनिवर, अब पौराणिक साहित्य के अधिकारी व्यक्तियों के नामों के विषय में सुनिए।
 
Nakshatrakalpa, Shantikalpa, Kasyapa, Angiras and others were also among the teachers of Atharvaveda. O sage, now listen to the names of the scholars of Puranic literature.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)