Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.7.25: हे ब्राह्मण, मैंने तुम्हें महामुनि व्यासदेव और उनके शिष्यों और शिष्यों के शिष्यों द्वारा की गई वेद शाखाओं के विस्तार का भली-भाँति वर्णन किया है। जो कोई इस कथा को सुनता है उसकी आध्यात्मिक शक्ति बढ़ जाती है। | bhagavat अध्याय 12.7: पौराणिक साहित्य । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मन्निदं समाख्यातं शाखाप्रणयनं मुने: ।
शिष्यशिष्यप्रशिष्याणां ब्रह्मतेजोविवर्धनम् ॥ २५ ॥
अनुवाद
हे ब्राह्मण, मैंने तुम्हें महामुनि व्यासदेव और उनके शिष्यों और शिष्यों के शिष्यों द्वारा की गई वेद शाखाओं के विस्तार का भली-भाँति वर्णन किया है। जो कोई इस कथा को सुनता है उसकी आध्यात्मिक शक्ति बढ़ जाती है।
O Brahmin, I have narrated to you in detail the details of the Vedas elaborated by the great sage Vyasa, his disciples and the disciples of his disciples. One who listens to this story, his spiritual power increases.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध बारह के अंतर्गत सातवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥