Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.7.17: ब्रह्मांड के विनाश के चार प्रकार हैं - नैमित्तिक, प्राकृतिक, नित्य और आत्यन्तिक। ये सभी सर्वोच्च ईश्वर की निहित शक्ति से प्रभावित होते हैं। विद्वान पंडितों ने इस विषय का नाम विलय रखा है। | bhagavat अध्याय 12.7: पौराणिक साहित्य । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मांड के विनाश के चार प्रकार हैं - नैमित्तिक, प्राकृतिक, नित्य और आत्यन्तिक। ये सभी सर्वोच्च ईश्वर की निहित शक्ति से प्रभावित होते हैं। विद्वान पंडितों ने इस विषय का नाम विलय रखा है।
There are four types of Brahma Pralaya - occasional, natural, eternal and ultimate. All of these are affected by the inherent power of God. Learned scholars have named this subject as Vilay.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥